
कटनी, रीठी।। GANESH UPADHYAY VANDE BHARAT LIVE TV NEWS KATNI MP.
कटनी-बीना रेल खंड का रीठी रेलवे स्टेशन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व विभागीय अधिकारियों की उदासीनता का शिकार होकर रह गया है। रीठी रेलवे स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए रोजमर्रा की जद्दोजहद बन गया है। सैकड़ों गांवों का यह प्रमुख स्टेशन यात्री ट्रेनों के स्टापेज से वंचित है, जिससे स्थानीय किसान, छात्र और मजदूरों को जबलपुर सहित अन्य शहरों तक पहुंचने में भारी कष्ट झेलना पड़ रहा है या फिर दूसरे साधनों का उपयोग कर इसका बोझ उनकी जेबों पर पड़ रहा है। बताया गया कि वर्ष 2019 से कोविड काल से बंद पड़ी कोटा-जबलपुर ट्रेन की अनुपस्थिति ने यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब स्थानीय निवासियों ने कोटा-जबलपुर एक्सप्रेस सहित कामायनी और दयोदय एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टापेज सुनिश्चित करने की मांग तेज कर दी है। 
धरना प्रदर्शन की चेतावनी
रीठी रेलवे स्टेशन, जो कटनी-जबलपुर रेल खंड पर एक महत्वपूर्ण कड़ी है, प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों का आवागमन संभालता है। लेकिन यहां पीने के पानी की किल्लत, बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होना और प्लेटफ़ॉर्म पर फैली गंदगी ने स्थिति को बदतर बना दिया है। सूखे नल, खराब वेंडिंग मशीनें और बिखरा कचरा न केवल असुविधा पैदा कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ा रहे हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गो को इसकी सबसे अधिक मार झेलनी पड़ रही है। यात्रियों ने बताया कि हर ट्रेन आने पर पानी ढूंढने में घंटों लग जाते हैं। बताया गया कि यह स्थिति विगत कई दिनों से बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने स्टेशन परिसर में अव्यवस्था व ट्रेनों के स्टापेज की मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
किसान फसल को बेचने और मजदूर रोजगार के लिए ट्रेनों पर निर्भर
रीठी एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां किसान फसल बेचने और मजदूर रोजगार के लिए ट्रेनों पर निर्भर है। छात्र-छात्राएं जबलपुर के कालेजों और स्कूलों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों पर मजबूर हैं, जो समय और धन दोनों वर्बाद कर रहे हैं। लोगों ने बताया कि जबलपुर-कोटा ट्रेन का पुनः चालू होना न केवल यात्री सुविधा बढा़एगा, बल्कि स्टेशन पर राजस्व वृद्धि से सुधार कार्यों के लिए धन भी जुटा सकेगा। स्थानीय संगठनों ने शीघ्र ही ठोस कदम न उठाए जाने पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। रेलवे मंत्री की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत ग्रामीण स्टेशनों का आधुनिकीकरण हो रहा है, लेकिन रीठी जैसे स्टेशनों पर इसका लाभ अभी तक नहीं पहुंचा। लोगों ने बताया कि इस मुद्दे पर रेल प्रशासन को भी विचार करना चाहिए।
लगा कचरे का ढेर, यात्री परेशान
प्लेटफार्म पर कचरे का ढेर लगा रहता है, जिससे दुर्गंध फैलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमने स्टेशन सुपरवाइजर (एसएस) को कई बार शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिले। यदि जबलपुर-कोटा ट्रेन पुनः चालू होकर यहां 5-10 मिनट रूक जाए तो क्षेत्र हजारों लोगों को राहत मिलेगी। सफाई का नामोनिशान नहीं है, जिससे बीमारियां फैलने का डर सताता है। लोगों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर सुधार न हुए तो, हम चुप नहीं बैठेंगे।
बैठने के लिए बेंच तक नहीं
यात्री सुरेश, मोहित ने बताया कि यहां बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं है। ट्रेन लेट होने पर घंटों खड़े रहना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी विकास को बाधित करती है। स्थानीय लोगों का कहना है हम शिकायत तो करते हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
पहुंच मार्ग भी जर्जर
देखा गया कि रीठी रेलवे स्टेशन पहुंच मार्ग भी दुर्दशा का शिकार होकर रह गया है। यह मार्ग किसी खेत की मेढ़ से कम नजर नहीं आता है। हिचकोले खाते वाहनों को स्टेशन पहुंचते-पहुंचते ही कई बार यात्रियों की ट्रेनें भी छूट जाती है। इस ओर न तो जिम्मेदार अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि।












